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कब बुझेगी आग

बाबुल के घर खेल कर बढ़ीं हो जाती है बेटी,
विश्वास के आधार पर पराये के घर जाती है बेटी,
दहेज खातिर लगा दी जाती है अपनी बहू को आग,
पता नहीं कब बुझेगी ये दहेज की आग,
इक लड़की अपना जीवन सौंप देती है दूजे के हाथ,
वचन देता है लड़का, रखूंगा जीवन भर साथ,
ससुराल में पहुंचते ही कर दी जाती है दहेज की मांग,
पता नहीं कब बुझेगी ये दहेज की आग,
रसोई गैस के सिलंडर फटने से मर जाती है,
कैरोसिन चूल्हे के फटने से जल जाती है,
कानून के सामने अलापते रहते ऐसे मिथ्या राग,
आग लगाने वाले आसानी से कानून से जाते भाग,
पता नहीं कब बुझेगी ये दहेज की आग,
लड़के के वंश खातिर कर देती जो खुबसूरती का त्याग,
जब गुस्सा आया तो दे दिया झट से तलाक,
दहेज लोभी, धर्म की आढ़ लेकर कर रहे पत्नी का त्याग,
पता नहीं कब बुझेगी ये दहेज की आग,
विकास गर्ग
©vicky