हवालात में हालात खराब, नहीं राहत की खबर।
कैदी सो ना पा रहे, पहरेदार मारे मच्छर।।
मच्छर मक्खी की भी जिंदगी, सूरज देव छीन रहे।
आज मैंने कितने मारे, शाम को है गिन रहे।।
गिन रहे हम भी दिन, कब तक रहेगी गर्मी।
पेट भर गया खा खाके, याद आ रही सर्दी।।
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©vikasgarg
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