कभी गुल से ये गुलशन गुलजार हुआ था
अब याद भी न रहा किस गुल से हमें प्यारा हुआ था।
वफाओं की खुशबू आया करती थी आंगन में मेरे
जब जब मैं उनकी चाहत में बिमार हुआ था।
आज भी याद है मुझे वो आलम वो गुज़रे दिन
मिलने के लिए उनसे जब मैं घंटों तैयार हुआ था।
भुलाए भुल भी नहीं सकता मैं उन लम्हों को
दोनों तरफ से जब अश्कों का बौछार हुआ था।
कैसे समझाऊं मैं अपने इस नादान दिल को अनुराग
इक गलतफहमी का वो भी शिकार हुआ था।
©anuragrahi
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