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कभी कभी दिल चाहता है, तेरे साथ किसी मेले की रोशनियों में खो जाऊँ… उस रस्सी पर…

कभी कभी दिल चाहता है,
तेरे साथ किसी मेले की रोशनियों में खो जाऊँ…
उस रस्सी पर चलती हुई उस लड़की को देखते देखते,
तेरी बाहों में अपनी दुनिया पा जाऊँ…

झूलों की रवानी में जब हवा बालों को छू जाए,
तो तेरा साथ हो और वक़्त भी कहीं ठहर जाए…
जब मेरे सीने में तितलियों का शोर मचने लगे,
तू मुझे अपनी बाहों में भर कर हर धड़कन को क़रार दे जाए…

मैं कोई हसीन सी पोशाक पहन कर तेरे साथ तस्वीर बन जाऊँ,
और उस याद को अपनी डायरी के दरमियानी पन्ने पर,
एक सूखे गुलाब के साथ महफ़ूज़ कर जाऊँ…

कभी चूड़ी की दुकान पर रुक कर ज़िद सी करूँ,
और तू अपने नर्म हाथों से मुझे रंग-बिरंगी चूड़ियाँ पहनाए…
उनकी खनक में मेरी हँसी घुल जाए,
और तेरा चेहरा और भी रोशन हो जाए…

फिर किसी गुड़िया के बाल वाले को रोक कर,
तेरे साथ उस मिठास का लुत्फ़ उठाऊँ…
और जब वह हल्की सी मेरे होठों को छू जाए,
तू अपनी उँगलियों से उसे प्यार से मिटा कर
मेरे एहसास को और गहरा बना जाए…

कभी बे-वजह सी झुमकों की ज़िद करूँ,
कभी बेकार सी छोटी छोटी ख्वाहिशें सजाऊँ…
मुझे ज़रूरत न हो उन चीज़ों की शायद,
पर तेरे साथ होने का हर लम्हा खरीद लाऊँ…

और फिर दिल से बस एक ही दुआ निकले—
काश ये ख्वाब हक़ीक़त बन जाए…
तू मेरे साथ चले
और एक बेहद खूबसूरत याद बन जाए....

Ink&Emotions