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कभी-कभी सोचती हूँ, तुम्हें गर्मियाँ पसंद नहीं… तो क्या दिन में घर से निकलते भी…
कभी-कभी सोचती हूँ,
तुम्हें गर्मियाँ पसंद नहीं…
तो क्या दिन में घर से निकलते भी होगे या नहीं?
तुम्हें ठंड भी जल्दी लग जाती है,
गरम कपड़े पहनते होगे ना… या फिर नहीं?
बारिश भी तो पसंद नहीं तुम्हें,
कहीं भीग तो नहीं जाते होगे चुप-चाप?
आँधी, तूफ़ान… उनसे भी डरते हो तुम,
खुद को संभाल पाते होगे ना हर बार?
मुझे नहीं पता तुम कैसे खुद को संभालते हो
हर एक मौसम में…
पर मैं…
अपने शहर में रहकर भी,
हर मौसम तुम्हारे शहर का देख लेती हूँ,
और तुम्हारी ही चिंता करती रहती हूँ। ❤️
InknEmotions ✍️