कभी खुद से तो कभी खुदा से पुछ लिया करो
मैं कौन हूं मेरी वफा से पुछ लिया करो।
ये इत्तफाक तो नहीं कि हम मिले इस तरह
चलीं थीं जहाँ से उस राह से पुछ लिया करो।
मुझे क्यूँ इस तरह पागल समझती हो
कभी अपनी इस जालिम अदा से पुछ लिया करो।
आखिर ग़म जताने को महफुज क्यूँ है मयखाने
कभी इन नशीली मयकश निगाह से पुछ लिया करो।
अनुराग अक्सर तुम्हें देख बेखुद क्यूँ हो जाता है
कभी अपने दिल-ओ-जां से पुछ लिया करो ।
©anuragrahi
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