S

कभी मेरा भी कोई अपना था ।

कभी मेरा भी कोई अपना था
जिंदगी में खुबसुरत सपना था।
आंखों को उनके इंतज़ार में
जाग जाग कर रात काटना था।
रवानी दिल की इस तरह थी तेज
उनके दिल में जल्दी बसना था।
गुलाब की पंखुड़ियों की तरह
खिलखिलातीं होठों को चुमना था।
घनघोर रेशमी जुल्फों की छांव में
पुरी उम्र भर के लिए ठहरना था।
एक इंद्रपरी संग सुंदर चंदन वन में
मंत्रमुग्ध होकर नृत्य करना था।
मगर पता नहीं था तनिक भी हमें
मेरे प्यार का दम एक दिन घुटना था।
क्यूँ लगाया रोग अनुराग को प्रेम का जब
नुरानी हिंदू-मुस्लिम ही रटना था
©anuragrahi