S

कभी तरन्नूम दिल की खुशी का खजाना था ।

कभी तरन्नूम दिल की खुशी का खजाना था
दिल की उठती तरंगों का अफसाना था।
हमें तो खुब महफुज रखा दिल ने हकीकतों से
इस चेहरे पर पल भर की मुस्कान का बहाना था।
आज कर ली है हमेशा के लिए हमसे वो तौबा
जिसे कभी हर रोज़ मेरे पास आना जाना था।
कुछ बातें सुनकर ही महफिल से वो उठ चली
उसे क्या पता हमें और क्या क्या बताना था।
हम उन आशिकों के लिए भी कैसे दुआ मांगे
जिन्हें अपने जां के हाथों बर्बाद हो जाना था।
रूखसत-ए-यार तुम्हें खुब जचीं अनुराग
छेड़ना न राग फिर तू जिसके पिछे दिवाना था।
©anuragrahi