कबुलनामा
मैं संतोष कुमार राही यह कबुल करता हूँ कि मैं आर्थिक क्षेत्र में एक असफल व्यक्ति रहा हूँ जो कमा कर अपने खुद की आमदनी से अपने बच्चों का भरणपोषण या अपने परिवार में माता पिता या किसी सदस्य को एक पैसा भी दिया हो इसके बदले उलटे ही अभी तक मैंने उन्ही से लिया है, जाने किस कारण से लगातार 48 वर्ष के उम्र के बाद भी मैं असफल होने के बावजूद भी जिंदा हूं, इसे मैं अपना सौभाग्य मानू या दुर्भाग्य यह भी मुझे पता नहीं, ऐसा नहीं कि मैंने पैसे कमाने के लिए कभी प्रयास नहीं किया, शादी के पहले यानि 1995 से ही मैं बार बार प्रदेश जाता था और किसी कारणवश जैसे काम न मिलना,मेरे सामर्थ्य लायक काम न होना, किसी की मदद करने के लिए काम को छोड़ देना जैसे कारण शामिल थे और घर लौट आता था,पत्नी के भाग्य से 7-8 साल व्यवसाय किया जिसमें उन्हें सफलता मिली मगर उनके देहांत के कुछ महीने बाद ही व्यवसाय चौपट हो गया, नुकसान के कारण बंद करना पड़ा तब से आज तक हजारों प्रयास किया लेकिन मैं सफल नहीं हुआ, बात अजीब यह है कि लोग बच्चों को पढाते है लेकिन मैं अपने जीवन काल में अपने इस ग्रेजुएशन अंग्रेजी ऑनर्स से जो कि भारत के हिंदीभाषी राज्य में एक स्थान रखता है इसका उपयोग कहीं नहीं मिला, भगवान् मुझे शायद अपने सभी अभिशाप मुझ पर ही थोपने के लिए जिंदा रखें है, अगर ऐसा है तो कुछ तो क्रेडिट्स मुझे भी मिले ,मुझे पता हो कि मैं भगवान् के विशेष प्रयोजन के लिए बना हूँ ,तो उद्देश्य मिल जाए,मेरे जेब खाली हैं इसलिए मुझे अब सब नापसंद करने लगे हैं, सच पुछिए तो मैं भी अब ऊब गया हूँ,मैं एक और आखिरी प्रयास सफलता की राह में करने जा रहा हूँ इसके बाद भी अगर असफल रहा तो भाग्य भगवान् अपने पराए सब से मेरा विश्वास उठ जाएगा, क्या करे मजबूरी है मुझे इस उम्र में भी सफल आदमी से उपदेश सुनना पड़ता है जैसे मैं अनुभवहिन हूँ।एक अनपढ़ रामायण महाभारत के हर एक पन्ने को कंठस्थ कर लेगा मैं तो पढा लिखा हूँ, सिर्फ मेरी आर्थिक मजबूरी, कहीं से भी न भाग्य से न भगवान् से मदद मिल पाना मेरे सभी गुणों को मिट्टी में मिला दिया है, इससे यह साबित होता है कि सब कुछ पैसा है, आप व्यवहार से अच्छे है, आप अच्छे लिख लेते हैं अच्छे बोल लेते हैं, आप ने कभी किसी का बुरा नहीं किया है यह सब कुछ मायने नहीं रखता, ये सब केवल सुनने के लिए कानों को कुछ पल के लिए राहत देते हैं।
धन्यवाद
संतोष कुमार राही
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