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कच्चे धागे।

बेसब्री से मेरी टकटकी निगाहें उस राह को देखती है,
जिससे सुबह शाम तू हर रोज अपने घर से निकलती हो।
बेचारे इस दिल को तेरे प्यार में शक की गुंजाइश ही कहा,
जो धोखा वफा में करने को भेष बदलकर निकलती हो।
©anuragrahi