जहां की हर पगडंडी में है ईश्वर का आभास..
जहां सांसों से टकराती है वहां फैली ईश्वरीय वात ..
जहां पहाड़ों की वादियो में लगते हैं ईश्वर बिराजे साक्षात.. जहां पल-पल प्रकृति लाती है विभिन्न मौसमों की सौगात.. कभी बादलों की धुअन ,
कभी सूर्य करने की छुअन ,
तो कभी बर्फ की गिरती है रुअन ,
और कभी बूंदो की होती है धरा पर सुअन ,
इन बदलाव की होती है उन पहाड़ों से बात..
जिनका आभास है हमारे हृदय के साथ..
उन बर्फ से श्रंगारित पहाड़ियों में चमक संग होती है प्रभात.. लगता है वहां ईश्वरीय ऊर्जा का भंडार है व्याप्त..
इस आभामंडल में गहरी सुकून की है बात..
मंदिर के निकट सहलाता है एक हाथ ,
लगता है गोद में बैठे हम ईश्वर के बहुत है पास..
रात्रि में होती है वहां सर्द हवाओं से मुलाकात..
क्योंकि वहां ईश्वर का पहरा देती है बर्फीली कायनात..
हृदय है आभारित कि,
ईश्वर ने इस काबिल बनाया कि
कर पाया वो इन अनुभव का साक्षात..
यहां व्यक्त कर इन पंक्तियों का अंतिम है वार्तालाप..
और नाम है अनुभवित पवित्र स्थल का केदारनाथ ।।
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