खाली दिल में तलाश क्या करती हो
मैं भी जानता हूं तुम मुझपे मरती हो।
इक कोरे कागज की तरह है मेरा दिल
हर रोज़ जिसपे कुछ न कुछ लिखती हो।
मेरे धड़कनों की ही सदा है तेरे कानों में
जो अक्सर अपनी कानों से सुना करती हो।
मुहब्बत बस इक आदत बन गई है मेरी
तुम किसके लिए इबादत किया करती हो।
अब शौक-ए-इश्क सजा रखा हूं अपने हूनर में
कुछ खफ़ा सा लगता है दिल जब तुम मुकरती हो।
मेरे उम्र निसार हैं तुझपे खुदा की कसम
बेवजह अनुराग से युंहीं क्यों डरती हो।
©anuragrahi
S