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ख़ामख़ा मुसीबत ये गले लगाता नहीं हूँ मैं , आईना अब किसी को दिखाता नहीं हूँ मैं…

ख़ामख़ा मुसीबत ये गले लगाता नहीं हूँ मैं ,
आईना अब किसी को दिखाता नहीं हूँ मैं ,
मेरे बताए रास्तों पर भटक जाते हैं मुसाफ़िर ,
लिहाज़ा अब किसी को रास्ता बताता नहीं हूँ मैं ।
©your_rohit