G gunjan29 en July 23, 2025 खामखां खामखां ज़िन्दगी को कोसते रहेउलझनें भी मेरी थी और गम भी मेरे थेएक लम्हा खुशियों का ढूंढने चले थेराहें भी मेरी थी और मंजिले भी मेरी थी©gunjan29