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ख़ामोशी

मैं ख़ामोश हूं "वो" सब देख रहा है
मेरी ख़ामोशी की वजह कोई यूं बन रहा है
इस ख़ामोशी को कम न समझना
ये बहुत है मुझे समझने वालों के लिए
'मुझे' यकीन है कि,
वो वक़्त भी जरूर आयेगा
जब मुझ पर उठे सवालों
को खारिज किया जाएगा
यूं ख़ामोश करके कोई
सुकुन में नहीं रह पाएगा
'मुझे' यकीन है कि ,
वो पल भी जरूर आयेगा
मेरे किरदार कि जो गवाही लाएगा
ओर मुझ पर लगाया हर इल्जाम
वो ख़ुद मिटाएगा
'मुझे' यकीन है कि ,
वो लम्हा भी जरूर आयेगा
जो उसे ख़ुद के कहे अल्फ़ाज़ो पर रूलाएगा
मुझे कहे हर अल्फ़ाज़ पर वो पछताएगा
अल्फ़ाज़ों का खेल है जनाब जो
किसी भी रिश्ते को यूं ही तोड़ जाएगा ।।
©maahisingh