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ख़ामोशी

ऐ मेरे हमसफ़र तुमने मुझे झूठा ठहराया,
मै उस वक्त खामोश इसलिए थी क्योंकि
मुझे ख़ुद को साबित करना न आया।
वो भी कितना लाजवाब वक्त था जिस वक्त तुमने
मुझसे सातों जनम हाथों में हाथ लिए साथ रहने के थे वादे किए
और वो भी कितना लाजवाब वक्त था
जिस वक्त तुमने किसी झूठ की खातिर वो वादे तोड़ दिए
मैं तो उस वक्त के इंतजार में वक्त गुजार रही हूं कि एक वक्त ज़रूर आएगा जिस वक्त तुम मेरी सच्चाई से रूबरू होगे
और उस वक्त तुम खुद की आबरू से दूर ज़रूर होगे।
©sharda