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खामोशपरिंदा.......

आयाम छू रहा है आसमाँ
तो गर्दिश में ये तारे क्यों हैं ,
कर्म करना है दौलत तो
हम किस्मत के सहारे क्यों हैं ?
क्यों है सवेरा , उसपर अंधेरा
बस साथ चल रहा है साया मेरा
है जुनून उसमें सुकून ,
अब काला पड़ गया है मेरा खून
बेसब्र बाते और वो इरादे
रह गये थे जो सपने आधे ,
बंद आंखों से देखा सवेरा
सो गया वो , जो था अंधेरा ।।
........शुभम........
©thakur