मंथन सत्य विचारों का,
विस्थापन निजी विकारों का,
संरक्षण अधिकारों का,
होना कहां सरल है....।
जीत में विनम्रता,
हार में स्वीकृत्ता,
प्रेम में विक्रियता,
होना कहां सरल है....।
प्रयास में विश्राम का,
सत्य पर संग्राम का,
योगी में काम का,
होना कहां सरल है....।
सुमन का व्योम में,
योग प्रति रोम में,
प्रीति शब्द ॐ में,
होना कहां सरल है....।
- प्रशांत शर्मा
©parshant
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