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खेल जिंदगी का

जाने क्यूं मिटती ही नही,मानव की हवस
मतलबी रिश्ते सारे,किसी बात में नही रस
कर रहा अंधाधुंध प्यारी प्रकृति का शोषण
रहने लगा है अब तो रब भी रूठा रूठा
खेल जिंदगी का बड़ा अनूठा
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©vicky31