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खेल जिंदगी का

खेल जिंदगी का बड़ा अनूठा
पता नही कब सांसे दिखा दे अंगूठा
घोल कर रूह में नफरत की हाला(शराब)
खुद का ही जिस्म शमशान बना डाला
बदहवास है सब यूं पैसे के पीछे
छोड़ता ही नही आदमी कभी लालच का खूंटा
खेल जिंदगी का बड़ा अनूठा
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©vicky31