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ख़्वाहिश ही तो हैं

मेरी भी कभी छोटी सी ख्वाहिश थी
की छोटा सा मेरा भी संसार हो
उसमे खुशिया सारी बेसुमार हो
सब कुछ तो ठीक था जिंदगी में
फिर वक़्त की आंधिया में सब कुछ तबाह हो गया
रोकने की कोसिस तो मेने बहुत की मगर
फिर भी मेरा सब कुछ स्वाहा हो गया
फिर मुझे कुछ ऐसा करना पड़ा जो कुछ ख्वाहिशे
बचा रखी मेने अपने भीतर तेरे लिए
फिर उन्ही ख्वाहिशो को अपने ही हाथो दफन करना पड़ा
अब ना कोई ख्वाहिश है दिल में ना अरमान रखता हु
वो जख्म मिले उन आँधियों से बस उन्हें ही भरने की
कोशिस दिनों रात करता हु
दुआ करता हु पूरे दिल से जो मेरे साथ हुआ
ना वो किसी के साथ हो
मेरी ख्वाहिशे ना रही हो बेशक तुम हमेसा तुम्हारी ख्वाहिशो के साथ रहो
Deepak sharma
©deepakshar