परिंदों से पूछो खुला आसमान कहां है..
सितारों से पूछो चमकता जहां कहां है..
नदियों से पूछो जल का प्रवाह कहां है..
सूरज से पूछो जलता ब्रह्मांड कहां है..
किनारों से पूछो कश्ती का ठहराव कहां है..
सहज प्राणी से पूछो कि ईश्वर का निवास कहां है...
जवाब होकर भी तु पूछता है उनसे की तलाश है इनकी इनका मकान कहां है....
ऐसे ही दुनिया में तु ढूंढता है खुद को झांक भीतर और पूछ कि पूछने वाले की पहचान कहां है.....
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