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खोने का डर

अब मुझे किसी को खोने का डर नही है।
निद्रा भोजन भोग भय , मेरे सिर नही है।
समस्या तुझसे है सामना ,तेरे लिए पीठ नही है।
आगाज रहेगा हर बार निरंतर प्रयास यही है
अब मुझे किसी को खोने का डर नही है।
खो जाऊ इस जहा मे किसी को दु:ख नही है।
खुद का जीवन खुद से वादा यही है।
जीवन भर रहे साथ हमारा खुद को बात कही है।
अब मुझे किसी को खोने का डर नही है।
मेरा जीवन चल रहा है उस दौर से।
निष्कृट से उच्च गुणो को,अब विराम नही है।
संघर्ष! संघर्ष! संघर्ष! अब कही भयभीत नही है।
कहे लोगो की,सुने लोगो की,इसमे अपना कुछ नही है।
विश्वास, कर्म ,शान्ति,धैर्य , कभी हारे नही है।
चित्त, चेतन, चिन्तन, कभी खोये नही है।
श्रेष्ठ, सक्षम, समर्थ बने कभी रोये नही है।
जीवन संघर्ष ,जीवन त्याग, जीवन समर्पण
कहे खुद से किसी को खोने का डर नही है
कलम से - साँवर लाल सोलंकी
©sanwar