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khubsurti ki inteha ho tum...

तुझे “पलकों” पर बिठाने को जी करता है,
तेरी “बाहों” से लिपट जाने को “दिल” करता है,
ख़ूबसूरती की “इन्तहा” हैं तू,
तुझे अपनी “ज़िन्दगी” बनाने को जी करता हैं”
©rohittiwar