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खुद से

जब खुद से मिले तो ऐहसास
हुआ, खुद से बेहतर तो हमें
कोई जानता ही नहीं,
बस युहीं रास्तों पर चले तो
ऐसा लगा सब तो साथ ही है
पर जब हाथ बढ़ाया तो कोई था
ही नहीं,
परींदे सी है ये जिंदगी, जब
हर परींदे को गिरते देखा....
©banirai