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" खुदाई "

भीतर की गहराई से जब मिलकर आते हैं तो खुद को किसी और ही दुनिया में पाते हैं....
कभी-कभी गीले पन में खो जाते हैं और कभी मुस्कुराहट की चांदनी में सो जाते हैं....
गहराई की खुदाई में खुद को कभी खोज लाते हैं और कभी उसी में खुद को खो जाते हैं....
खुदाई कर वापस ऊपर आते हैं और नीचे की गहराई से खुद को अवगत कराते हैं....
ना जाने कैसे यूं ही खुद में हम विभोर हो जाते हैं और थोड़ा-थोड़ा ईश्वर की ओर हो जाते हैं....
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