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ख़ुलूस-ए-जिंदगी ।

कभी ख्वाबों में ही मेरा ऐतबार कर लो
मेरे दिल के जज्बातों का इकरार कर लो,
अब हम न आऐंगे दुबारा वस्ल-ए-यार को
चाहें जिंदगी भर तू मेरा इंतज़ार कर लो।
©anuragrahi