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खुशबु अब बिखर चली है।

खुशबु अब बिखर चली है
गुल अब सिकुड़ चली है।
ये हवा किसका साथ दे।
ये वादियां महक चली है।
उनकी दामन में लगे है कई रंग
हर रंग अब चमक चली है।
हम कैसे बताए अब उन्हें
दिल की हालत संभल चली है।
आज उनसे जुदा होने का वक्त है
हर खुशी अब सिमट चली है।
अब दिन काटो गिन गिन के अनुराग
रूह यह पैरहन अब बदल चली है।
©anuragrahi