लिहाज़ लहजा नहीं कि बात कैसे बतानी है
फक़त कहना तो ये था कि तुम मेरे दिल की रानी है
चांदनी रात में क्यों दरिया पे नहाती हो
सोये हुए पानी में क्या आग लगानी है।
©anuragrahi
लिहाज़ लहजा नहीं कि बात कैसे बतानी है
फक़त कहना तो ये था कि तुम मेरे दिल की रानी है
चांदनी रात में क्यों दरिया पे नहाती हो
सोये हुए पानी में क्या आग लगानी है।
©anuragrahi