S

ख्वाब-ओ-ख्याल में नहीं म्यान-ऎ-दिल में रहा करो ।

ख्वाब-ओ-ख्याल में नहीं म्यान-ऎ-दिल में रहा करो
इस्तिफाक से आई हो समने निगाह-ऎ-दिल में रहा करो।
गुमगश्ता ये रूह मेरा किसी अजनबी रूह से है जा मिला
गुजारा समझ बेचारे दिल का संग-ऎ-दिल में रहा करो।
चांद की ये चांदनी दूर रहकर भी एहसास ये कराती है
जिंदगी मायुस नहीं खलिश छोड़ रंग-ऎ-दिल में रहा करो।
आज कल की बात है किसे है गुजारना जामाना यहां
बेचैन दिल ये मेरा नहीं तुम राहत-ऎ-दिल में रहा करो।
गर्द से दबी मेरी दास्तां, कोई झोका नहीं अब मौसम में है
धुल जो उड़ा सके,इलतजा कि तू साथ गर्द-ऎ-दिल में रहा करो।
हर सोज़ अब मेरे सहर में है बिती हुई सियाह रात की।
हमदर्द बन अनुराग की दर्द-ऎ-दिल में रहा करो।
अर्थ :- गुमगश्ता-भटका हुआ,खलिश-चुभन,इलतजा-अनुरोध करना,सहर-सुबह
©anuragrahi