अगर ख्वाबो का कोई दरिया होता,
हम दोनों के डूबने का वो जरिया होता।
ज़िन्दगी की मुश्किलो से मुक्त,
हमारा साथ क्या बढ़िया होता।
परवाज होती हमारी पंखों में अलग ही,
फलक से ज़मी तक हमारा ही पहरा होता।
महल सा अपना ख्वाबो का घरोंदा होता,
आंखों ही आंखों में बातो का समंदर होता।
ज़िन्दगी जीने का भी क्या जनून होता,
ख्वाबो सी जिंदगी का जरिया होता।
वो जो मुमकिन न हो मुमकिन ये बना देता है,
ख्वाब दरिया के दो किनारो को मिला देता है।
©piku
P