ख्वाबों में मेरे रात-दिन बसने वाली
बता ऐसी सुरत तूने पायी कहाँ से।
हर पल गमों में डूबे रहने वाले
बता ये ख्वाब तूझे आया कहाँ से।
ये झिलमिल सितारे सब कुछ कह रही है
भरी रात ये आंखें शायद देखा वहां से।
इन आखों पर इतना रहम करने वाले
तेरे दिल में तसब्बुर है आया कहाँ से।
ये मयकश निगाहें ये तन्हाई ये आलम
और क्या क्या बताए है आया कहाँ से।
यूं ऐसे ख्वाबों से अक्सर जुड़े रहने वाले
बता और क्या क्या तूने है देखा वहां से।
मैं कभी वादियों में तो कभी गुलसितां में
जुस्तजू कुछ तो करते है तूझे पाया वहां से।
अरे बातों ही बातों में ये दिल लेने वाले
मैं तेरी हूं बता दो है मिलना कहां पे।
©anuragrahi
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