उम्मीदों के समंदर में ख्वाहिशो का जहाज़ है,
आंधियों का शोर- बेखौफ तुफान- और साथ में बेकाबू बरसात हैं।
शायद बुरे वक़्त का, ये नया आगाज़ है,
पर उस वक़्त खुद से पुछता गालिब....
यें अंत है सफ़र का या फिर कोई नई शुरुआत हैं।⛈️
©sahilsing2
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