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ख्वाहिश

पहली दफा ऐसा हुआ है कि,
मै चाहता हूं की कोई मेरे दिलो दिमाक से निकाल जाए।
काश सब कुछ पहले जैसा हो जाए ,
ए खुदा तू भी अब कोशिश मत कर ,
मेरा इश्क अधूरा ही रह जाए ।
वो जिसकी थी वो उसी की हो जाए ,
क्या करुंगा ऐसे इश्क का ,
ए खुदा तू ही बता जो मेरी मुराद के लिए तू किसी से छीन कर लाए ।
नहीं चाहिए अब कुछ भी बस मुझे तेरे चरणों में थोड़ी शरण मिल जाए ।
करुगा बस तेरी भक्ती बस उसको उसकी जन्नत मिल जाए ।
©sandeepgup