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ख्वाईश और मंजिल

हजार ख्वाहिशों का
बोझ लिए चलते हैं
मंज़िल मिले या ना मिले
मेहनत किए चलते हैं
हर कदम पर मिलती हैं मुश्किले
मगर संघर्ष किए चलते हैं
जीतना हैं रेगिस्तान इसलिए
आँखों में पानी लिए चलते हैं
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