5 5bharat en July 23, 2025 ख्वाईश और मंजिल हजार ख्वाहिशों का बोझ लिए चलते हैं मंज़िल मिले या ना मिलेमेहनत किए चलते हैंहर कदम पर मिलती हैं मुश्किलेमगर संघर्ष किए चलते हैंजीतना हैं रेगिस्तान इसलिएआँखों में पानी लिए चलते हैं©5bharat