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खवाइश

ख्वाइशें कभी खत्म नहीं होती...
सच है
मगर हम खाविशों के नहीं
अपनों के शिकार है!!
आज भी इन आँखों में बस उसका ही इंतज़ार है
अजीब तो कुछ भी नहीं
लेकिन फिर भी मन उदास है
जैसे तृष्णा से भरा ये मन अब भी नाराज़ है!!
©shaaya