S shaaya en July 23, 2025 खवाइश ख्वाइशें कभी खत्म नहीं होती...सच हैमगर हम खाविशों के नहींअपनों के शिकार है!!आज भी इन आँखों में बस उसका ही इंतज़ार हैअजीब तो कुछ भी नहींलेकिन फिर भी मन उदास हैजैसे तृष्णा से भरा ये मन अब भी नाराज़ है!!©shaaya