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ख्य़ाब🤗

कुछ दिनों की बात है..... तुम ख्याबों में आये और चुपके से मेरे कानो में कुछ कहने ही बाले थे कि अचानक से मुझे कुछ गिरने की आवाज़ आई मैं घबराते हुए डर कर उठ बैठी और सहम सी गई....ना जाने वो कैसी आवाज़ ना जाने वो कैसा ख्याव था जो.....जो मुझे तुम्हारी झलक तक नहीं दिखाई देती.....हर रात मेरे ख्वाबों में आने वाले, कौन हो तुम,क्यु मुझे तुम्हारी कुछ झलकियां दिखाई देती है .....(कुछ अतीत कभी नहीं भुलाये जाते कभी ना कभी कहीं ना कहीं किसी भी रूप में वो हमारे सामने आ ही जाते हैं)...........
इन अधूरो ख्यावो की यही पूरी दास्तां है, जिंदगी में कुछ सपने अधूरे हीं रहे तो ही हम जिंदगी में आगे बढ़ पाते हैं.....
©nimita