ख्याल में मेरे जब भी कोई ख्याल आए
इन आंखों ने कब्र पे तेरे शबनम उतार आए।
बे-रूखी जिंदगी से अब बढ गई इतनी
बेपनाह फिर किसी पे कैसे प्यार आए।
तेरे हिज्र से मैं इतना कमजोर हो चला
कुव्वत नहीं कि जिंदगी फिर संवार आए।
देख रहा था गम-ए-जहाँ का हिसाब
याद तुम आज फिर बे-हिसाब आए।
मेरे यां चराग नहीं तेरे वां अफताब होंगे
मिशाल ये सभी सुख अब नागवार आए।
दिल-ए-अनुराग बाग-बाग था कभी जमाने में
शिद्दत-ए-तिश्नगी नहीं कि आंगन महताब आए।
©anuragrahi
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