किस घड़ी अब खत्म मेरी इम्तिहान होगी
गैरों के शहर में किसी दोस्त से मुलाकात होगी।
यहाँ तो सभी के चेहरे ढके है मुखौटे से
फिर किस तरह अच्छे-बुरे की पहचान होगी।
जो साथ है वो भी हमेशा साथ नहीं रहेंगे
किसलिए फिर कोई मुहब्बत जवां होगी।
याद जब आए किसी की तो मयकदे में चले जाना
तेरे सिवा और नहीं कोई वहाँ सदा होगी।
इश्क के मारो का अब तक दवा न कोई हकीम
बर्बाद होती रही जिंदगी और बर्बाद होगी।
मुनासिब है रियाज़ को अनुराग इम्तिहान देते रहना
जाने किसके जुबान पर कब कौन सवाल होगी।
©anuragrahi
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