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किस ख़त में रखकर भेजूँ, अपने इंतजार को, बेजुबां है इश्क़, ढूंढता है ख़ामोशी…

किस ख़त में रखकर भेजूँ,
अपने इंतजार को, बेजुबां है इश्क़,
ढूंढता है ख़ामोशी से तुझे....
©rohittiwar