किसी की आरजू से हमनें खुद को किनारा कर बैठा
मुफलिसी की जंग में ग़मों का इजारा कर बैठा ।
तवायफ बन चुकी है इमान व हूनर हमारी
कांसे के लिए दर दर जा कर है मुजरा कर बैठा ।
सितम ये नहीं कि मैं हो चुका हूं कर्जदार साहुकारों का
सितम ये कि मुझसे लौंगटिया यार किनारा कर बैठा
मैं तो काग़ज़ी रईश तो करिब अपने बचपन से था
मगर असल में ताउम्र नसीब ने है खसारा कर बैठा ।
मैं जानता हूँ कि वो मुझे सेहतमंद नहीं रहने देंगे
बेबसी है कि अदु से रिश्ता-ए-दिल दुबारा कर बैठा।
कभी अनुराग की जेब की भी ताबिश बढा जाओ
कई अर्से से मौसम-ए-सर्द-ए-कंगाली में है गुजारा कर बैठा।
©anuragrahi
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