A

किसी रोज

गुज़र जाएगी जिदंगी किसी रोज शाम की तरह
भूल जाएंगे किसी रोज तुम्हें गणित के सवाल की तरह
कभी तरसते थे एक दिदार को, एक रोज ऐसा भी आएगा, तुम सामने होगे हम नजरअंदाज़ कर जाएगें
किसी इश्तिहार की तरह
Arpita Suman rai
©Arpita Rai