B bishmil en July 23, 2025 किस्मत अपनी क़िस्मत में अज़ल ही से सितम रक्खा था,रंज रक्खा था, मिहन रक्खा था, ग़म रक्खा था,किसको परवाह थी, और किसमें ये दम रक्खा था,हमने जब वादी-ए-गुरबत में क़दम रखा था,दूर तक यादे-वतन आई थी समझाने को!Bishmil ✍️©bishmil