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किस्मत

अपने जिन्दगी का मक्सद ढूंढना
आसान नही होता
तेज बहती धारा मे चल कर जाना
आसान नहीं होता
अक्सर लोग थक जाते हैं
मुकाम तक आते आते
लेकिन सिर्फ मुकाम को पाना
हर जिन्दगी का मक्सद नही होता
और जिन्दगी का सफर ही
एसा सुरु हुआ है जिसका
किनारा ही समझ नही आता
इन लहरो के बीच मझधार मे
जाना कहा है समझ नही आता
मुझे विस्वास है कुदरत के नियमो पर
उसने जरुर मेरे लिये कुछ खास मक्सद
बनाया होगा
इसिलिए तो अभी तक किनारा नही आया
सायद अभी परिक्क्य नही हूँ मै
उसकी नजरो मे
सायद इसिलिए लिये अभी तक
कोई राह नही बनाया
मुझे तो इंतजार है उस इन्सा का
जो रणतरि बनकर मुझे
मेरे मुकाम तक पहूँचाएगा
सायद मेरा मेरा मक्सद ही
इस जहां के काम आयेगा
©nihalnat