झिमझिमाती बूंदों की सरगम ने कहा
बहती बयार ने कहा
उड़ते बादलों ने कहा
चमकती बिजली ने कहा ,
चांद तारों ने कहा
नीले अम्बर ने कहा ,
महकते फूलों ने कहा
लहलहाते खेतों ने कहा ,
ओस की बूंदों ने कहा
प्रभात की लालिमा ने कहा ,
सांझ की सतरंगी ने कहा
वीरान जंगलों ने कहा,
सुनसान गलियों ने कहा
बहती नदियों ने कहा,
ठहरे समुंदर ने कहा
बस सब कहते ही रह गए !
पर सुनने वाला कोई नहीं था।
©anusingh
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