कल पूछा था तुमने मुझसे,
कौन हूँ मैं तेरे लिए…
बताऊंगी तुम्हें कुछ ऐसे जाना,
समझ लेना मेरे दिल की पुकार जाना…
सीधे सीधे कहना नहीं आता मुझको
तुम भी तो कुछ आम नहीं जाना…
कोई एहसास नहीं, एक पूरी शायरी हो तुम,
मेरी हर धड़कन की जिम्मेदारी हो तुम…
सुनो जाना…
तुम मेरा दिन, तुम मेरी रात हो,
दिन के आठों पहर, हर पहर का हर लम्हा हो…
मेरे दिन में गुजरने वाला हर पल हो तुम,
हर पल से मिलकर बना मेरा कल हो तुम…
पल से दिन, दिन से हफ्ता,
हफ्ता से महीना, महीने से साल हो तुम…
सालों तक चाहूं जो टूटकर तुम्हें,
उस चाहत से बनी मेरी पूरी उम्र हो तुम…
और सुनो…
वो उम्र जो तेरे साथ बीत जाए,
मेरे लिए वही एक जनम हो तुम …
एक नहीं, सात नहीं…
हर जनम, हर जनम, हर जनम हो तुम…
मेरी धड़कनों से गुजरती हर सांस हो तुम,
मेरे होने का हर एक एहसास हो तुम…
तेरे हाथ से छूकर जो हवा मुझे छू जाए,
उस मीठी सी छुअन का नाम हो तुम…
मेरे पतझड़, मेरा बसंत हो तुम,
मेरी बहार, मेरी सर्दियां, मेरी हर गरमाहट हो तुम…
बारिश की पहली भी तुम,
और आखिरी बूंद का सुकून भी तुम…
मेरे कानों में बजता हर संगीत हो तुम,
और हर संगीत को रूह देने वाला साज़ हो तुम…
सुनो ना जाना…
आईने में दिखने वाला अक्स हो तुम,
मांग में सजने वाला सिंदूर हो तुम…
मेरी चूड़ियों की खनखनाहट हो तुम,
पायल की मीठी झंकार हो तुम…
माथे पर सजता लाल टीका हो तुम,
गले में पहना वो पवित्र निशान हो तुम…
मेरे हाथों की मेहंदी में लिखा नाम हो तुम
मेरी हर पूजा का कारण हो तुम…
मेरी हर दुआ की वजह हो तुम,
मेरी हर मन्नत का बंधा धागा हो तुम…
मेरी हर सुहानी रातों का चांद हो तुम…
और सुनो जाना…
पूरा एक जीवन भी कम पड़ जाए तुझे इश्क करने में,
जीवन के बाद का जीवन हो तुम…
सदियों तक चाहूं तुझे, बिना रुके, बिना थके,
मेरी रूह की हर खामोश आवाज हो तुम…
और जाना…
मेरे सफर का पहला रास्ता और आखिरी पड़ाव हो तुम,
उस पड़ाव के बाद मिलने वाली मंज़िल हो तुम…
और अब आखिरी बात…
कितना कहूं, क्या-क्या कहूं… बस ये जान लो जाना,
मेरे प्रारंभ से लेकर मेरा अंत हो तुम…
और उस अंत के बाद होने वाला,
फिर से एक नया आरंभ हो तुम…
-शिवन्या