V

कलियों को मुसकाने दो

मरे हुए इक रावण को
हर साल जलाते हैं हम लोग
ज़िन्दा रावण-कंसों से तो
आँख चुराते हैं हम लोग
ख़ून हुआ है अपना पानी,
उसमें आग लगाने दो
खिलने दो ख़ुशबू पहचानो,
कलियों को मुसकाने दो•
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©vikasgarg