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" कलम "

जब भी वो हमारे हाथों में आता है....
मन की गहराई को खाली कर जाता है.....
मन की राहों को पन्नों से मिलाता है......
पन्नों की पंक्ति को स्याही से सजाता है.....
और अपनी चुभन से पन्नों का मोल बढ़ाता है....
मन के बीजों को पन्नों में उगाता है......
और क्यारियो को शब्दों का पानी पिलाता है.....
जहन से हमारे वो रूबरू कराता है.....
मन से हमारे गहरा रिश्ता निभाता है .....
और सुख दुख में उसका सहभागी बन जाता है....
लेखकों को वो अपना हमराह बनाता है....
और जग में वो कलम कहलाता है....
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