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कलम

मेरी कलम खून लिखती है
धूल जाता है कोई रंग
जब भी कोई जूनून लिखती है
शहम जाता है कागज़ भी
जब उस पर अपने उसूल लिखती हैं
Written by Sarita Nain
©saritanain