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कलम और दवात-1

ये कैसे अद्भूत मोती,
अल्फाजों के ऐ मालिक तूने मेरे ख्यालों में बो दिए,
जब भी देखा कोई कोरा कागज,
मेरी कलम और दवात रो दिए,
बेवजह बरसाई तूने रहमतों की बरसात,
कंक्रीट के जंगलो पर ,
हजारों करोड़ो अनमोल मोती,
तूने बिन बात के खो दिये
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©vicky